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श्री शङ्कराचार्य विरचित – अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र

शिव बिना शक्ति के शव समान है। शिव और शक्ति एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जिस प्रकार सूर्य और प्रकाश अलग नहीं किया जा सकता वैसे ही शिव और शक्ति को अलग नहीं किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार शिवा और शक्ति एक दूसरे के बिना शक्तिहीन हैं। इस अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र / स्तुति की करने से शिव-शक्ति की

शिवयजुर्मन्त्र (Shivayajurmantra)

चाहे कोई भी पूजा , अभिषेक, या जागरण हो। यह चाहे घर में हो या मंदिर में हो। किसी भी देवी देवता का हो परन्तु एक मंत्र के बिना आरती पूर्ण नहीं माना जाता है वह है कर्पूरगौरं करुणावतारम् ( karpur gauram karunavtaram)। महादेव का यह स्तोत्र शिव पार्वती के विवाह के अवसर पर स्वयं भगवान विष्णु द्वारा गाया गया

जब प्रभु राम और भगवन महादेव में हुई थी भीषण युद्ध – जानें किसकी हुई थी जीत?

प्रभु राम और भगवन महादेव में भीषण युद्ध (Fight between Ram and Mahadev Shiv) बात त्रेता युग की है जब भगवान विष्णु अपने सातवें अवतार में श्री राम (Sri Ram) के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। भगवान राम ने रावण का वद्ध कर अयोध्या लौटने के बाद एक अश्वमेघ यज्ञ किया था। उन दिनों वही सम्राट अश्वमेघ यज्ञ

नंदी ने शिव और पार्वती का मिलन कराया

नंदी ने शिव और पार्वती का मिलन कराया (Nandi marries Shiva and Parvati) कैलाश पर्वत पर भगवन महादेव अपनी अर्धांगनी पार्वती देवी को वेद की महात्म्य बता रहे थे जो बर्षों तक चलता रहा। इसी दौरान एक दिन पार्वती देवी की एकाग्रता कुछ छण के लिए टूट गयी। इस पर भगवन भोलेनाथ क्रोधित हो गए और क्रोध में उन्होने पार्वती

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirling Stotra)

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirlinga Stotra) इस छोटे से शिव स्तोत्र को सुबह शाम पढ़ने मात्र से सात जन्मों का पाप कटित होता है। चार पंक्तियों के द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) स्तोत्र में बताया गया है कि किस जगह पर है शिव के 12 ज्योतिर्लिङ्ग हैं जिसके स्मरण मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है । स्तोत्र :-

महादेव और सती का प्रेम कथा – कैसे निर्माण हुआ शक्ति पीठ का

महादेव और सती का प्रेम कथा – शक्ति पीठ का निर्माण दक्ष प्रजापति के कई सुन्दर और सुशील पुत्रियां थीं। परन्तु वो एक सर्व शक्ति संपन्न, सर्वत्र विजयिनी पुत्री की चाहत रखते थे। जो गुणवती, रूपवती , वीरांगना, दयावान आदि सभी गुण से परिपूर्ण हों। अपितु ऐसी पुत्री की प्राप्ति के लिए उन्होंने तपस्या प्रारम्भ कर दिए। बहुत दिनों के

शिव पार्वती विवाह की कहानी

शिव पार्वती विवाह की कहानी (Story of Shiv Parvati wedding in Hindi) राजा हिमवत और रानी मैना की बेटी के रूप में धरती पर फिर से देवी सती ने जन्म लिया। माता और पिता ने उसका नाम पार्वती (Parvati) रखा। नारद मुनि को पता चला की हिमवत और रानी मैना ने एक बच्ची को जन्म दिया है तो उसे देखने

भगवान महादेव भी नहीं बच पाए शनिदेव के कुदृष्टि से

भगवान महादेव पर शनिदेव के कुदृष्टि हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह के पिता सूर्य देव और माता छाया देवी हैं। शनि देव बहुत ही उग्र स्वाभाव के मने जाते है। बचपन से ही शनि देव बड़े ही उदण्ड स्वाभाव के थे। उनकी इस स्वाभाव से पिता सूर्य देव बहुत ही कुपित थे। एक दिन परेशान होकर सूर्य देव

भगवान शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए मगरमच्छ रूप धारण किया

भगवान शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए बने  मगरमच्छ यह कथा उस समय कि है जब भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्ति के लिए देवी पार्वती जंगल में घोर तपस्या में लीन थी। उनकी ऐसी तपस्या देख कर समस्त देवगण शिव जी से प्रार्थना कर रहे थे कि हे देवाधिदेव पार्वती की मनोकामना पूरा करें। भगवन शिव

श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa)

श्री शिव चालीसा – Shri Shiv Chalisa हमारे हिन्दू धर्म में भगवान शिव एक ऐसे देव हैं जो सभी विघ्न बाधाओं से अपने अपन भक्तो को दूर रखते हैं। शास्त्र के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेव हैं जो क्रमशः संसार के रचयिता, संचालक और संहारक हैं। शिव के भक्तों को मृत्य का भय नहीं सताता। प्रति दिन शिव चालीसा

महादेव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र शिव रूद्राष्टकम (Shiv Rudrashtakam)

शिव रूद्राष्टकम (Shiv Rudrashtakam) भगवान शिव के अनेक स्तोत्रों में एक विशेष स्तोत्र है शिव रुद्राष्टक (Shiv Rudrashtakam)। जो भी मानव इस विशेष स्तोत्र का नियमित सश्वर श्रद्धापूर्वक पाठ करता है उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। रामचरित मानस से लिया गया इस स्तोत्र को नियमियत पाठ कर मनुष्य सभी प्रकार के दुःख, दारिद्र और बाधा से