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शिवयजुर्मन्त्र (Shivayajurmantra)

चाहे कोई भी पूजा , अभिषेक, या जागरण हो। यह चाहे घर में हो या मंदिर में हो। किसी भी देवी देवता का हो परन्तु एक मंत्र के बिना आरती पूर्ण नहीं माना जाता है वह है कर्पूरगौरं करुणावतारम् ( karpur gauram karunavtaram)। महादेव का यह स्तोत्र शिव पार्वती के विवाह के अवसर पर स्वयं भगवान विष्णु द्वारा गाया गया

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirling Stotra)

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirlinga Stotra) इस छोटे से शिव स्तोत्र को सुबह शाम पढ़ने मात्र से सात जन्मों का पाप कटित होता है। चार पंक्तियों के द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) स्तोत्र में बताया गया है कि किस जगह पर है शिव के 12 ज्योतिर्लिङ्ग हैं जिसके स्मरण मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है । स्तोत्र :-

शिव पार्वती विवाह की कहानी

शिव पार्वती विवाह की कहानी (Story of Shiv Parvati wedding in Hindi) राजा हिमवत और रानी मैना की बेटी के रूप में धरती पर फिर से देवी सती ने जन्म लिया। माता और पिता ने उसका नाम पार्वती (Parvati) रखा। नारद मुनि को पता चला की हिमवत और रानी मैना ने एक बच्ची को जन्म दिया है तो उसे देखने

भगवान महादेव भी नहीं बच पाए शनिदेव के कुदृष्टि से

भगवान महादेव पर शनिदेव के कुदृष्टि हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह के पिता सूर्य देव और माता छाया देवी हैं। शनि देव बहुत ही उग्र स्वाभाव के मने जाते है। बचपन से ही शनि देव बड़े ही उदण्ड स्वाभाव के थे। उनकी इस स्वाभाव से पिता सूर्य देव बहुत ही कुपित थे। एक दिन परेशान होकर सूर्य देव

महादेव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र शिव रूद्राष्टकम (Shiv Rudrashtakam)

शिव रूद्राष्टकम (Shiv Rudrashtakam) भगवान शिव के अनेक स्तोत्रों में एक विशेष स्तोत्र है शिव रुद्राष्टक (Shiv Rudrashtakam)। जो भी मानव इस विशेष स्तोत्र का नियमित सश्वर श्रद्धापूर्वक पाठ करता है उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। रामचरित मानस से लिया गया इस स्तोत्र को नियमियत पाठ कर मनुष्य सभी प्रकार के दुःख, दारिद्र और बाधा से