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श्री शङ्कराचार्य विरचित – अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र

शिव बिना शक्ति के शव समान है। शिव और शक्ति एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जिस प्रकार सूर्य और प्रकाश अलग नहीं किया जा सकता वैसे ही शिव और शक्ति को अलग नहीं किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार शिवा और शक्ति एक दूसरे के बिना शक्तिहीन हैं। इस अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र / स्तुति की करने से शिव-शक्ति की संयुक्त कृपा प्राप्त होती हैं ।

शिव महापुराण में उद्धृत है ‘शंकर: पुरुषा: सर्वे स्त्रिय: सर्वा महेश्वरी ।’ अर्थात्– समस्त पुरुष भगवान शंकर के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती की अंश हैं, उन्हीं भगवान अर्धनारीश्वर (अर्धनारीनटेश्वर) से ही इस समग्र चराचर का निर्माण हुआ है ।

॥ अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र ॥

चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय ।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ १ ॥

कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारजः पुंजविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ २ ॥

चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय ।
हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ३ ॥

विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय ।
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ४ ॥

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय ।
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ५ ॥

अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ६ ॥

प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यैजगदेकपित्रे नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ७ ॥

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ८ ॥

एतत् पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी ।
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धि: ॥ ९ ॥

॥ इति आदिशंकराचार्य विरचित अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥