Category

शिव दारिद्रय दहन स्तोत्र (Shiv Daridray Dahan Stotra)

हर युग में चाहे सतयुग हो या कलयुग, लोगों के बीच आर्थिक असामनताऐं पाई जाती रही है। और हमेशा से गरीबी को एक अभिशाप के रूप में देखा जाता है। हर युग में देवता से लेकर ऋषि मुनि तक गरीबी दूर करने के कोशिश करते रहे हैं। इसी क्रम में भगवान राम के कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ जी ने शिव दारिद्रय दहन स्तोत्र (Shiv Daridray Dahan Stotra) की रचना की। यह स्तोत्र बहुत ही असरदायक माना जाता है।

व्यक्ति चाहे कितनी भी गरीबी में हो, कितना भी बड़ा कर्ज का बोझ हो,व्यापार में घाटा हो गया हो, शिव दारिद्रय दहन स्तोत्र (Shiv Daridray Dahan Stotra) का नियमित पाठ बहुत ही लाभदायक साबित होगा।

शास्त्रोक्ति है

‘बभक्षित: किं न करोति पापम्‌।
क्षीणा: नरा: निष्करूणा भवन्ति।।’

अर्थात भूखा मनुष्य कौन सा पाप नहीं करता। हमारे धर्म में कई पुजा, स्तोत्र, व अनुष्ठान है जिनसे गरीबी से मुक्ति मिलती है। भगवान शिव का ‘दारिद्रय दहन स्तोत्र’ के साथ किसी मंदिर में शिव के अभिषेक करने से व्यक्ति की दरिद्रता दूर होती है। यह स्तोत्र दरिद्रता को जड़ से मिटने में सहायक है।

।।दारिद्रय दहन स्तोत्रम् (Shiv Daridray Dahan Stotra)।।

विश्वेशराय नरकार्ण अवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय।
कर्पूर कान्ति धवलाय, जटाधराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।1।।

गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय,
कलांतकाय भुजगाधिप कंकणाय।
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
द्रारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।2।।

भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्ग भवसागर तारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।3।।

चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय,
भालेक्षणाय मणिकुंडल-मण्डिताय।
मँजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।4।।

पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मंडिताय।
आनंद भूमि वरदाय तमोमयाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।5।।

भानुप्रियाय भवसागर तारणाय,
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।6।।

रामप्रियाय रधुनाथ वरप्रदाय
नाग प्रियाय नरकार्ण अवताराणाय।
पुण्येषु पुण्य भरिताय सुरार्चिताय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।7।।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय।
मातंग चर्म वसनाय महेश्वराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।8।।

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्व रोग निवारणम्
सर्व संपत् करं शीघ्रं पुत्र पौत्रादि वर्धनम्।।

शुभदं कामदं ह्दयं धनधान्य प्रवर्धनम्
त्रिसंध्यं यः पठेन् नित्यम् स हि स्वर्गम् वाप्युन्यात्।।9।।

।।इति श्रीवशिष्ठरचितं दारिद्रयुदुखदहन शिवस्तोत्रम (Shiv Daridray Dahan Stotra) संपूर्णम्।।

।।इति संपूर्णंम्।।