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शिव और भस्मासुर की कहानी (Shiv Bhasmasura Story)

शिव और भस्मासुर की कहानी (Shiv Bhasmasura Story)

किसी समय भस्मासुर (Bhasmasura) नाम का एक राक्षस पृथ्वी पर रहता था। वह बहुत ही साहसी और निर्भीक था परन्तु वह महान मुर्ख था। वह कुछ भी करने से पहले उसके बारे में सोचता नहीं था । वह संसार में सबसे शक्तशाली बनने का चाहत रखता था। एक दिन, उन्होंने भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के लिए उनकी तपस्या करने का फैसला किया। उसने जंगल में एकांत जगह चयन किया और वहां पर भगवान शिव की घोर तपस्या में लीन हो गया। वह अपने तपस्या दौरान प्रत्येक दिन शरीर के एक हिस्से को काटकर भगवान शिव को अर्पित कर देता था।

इस तरह बर्षों की तपस्या के बाद भगवान शिव उस पर प्रसन्न हुए और उसके सामने प्रकट होकर उसे वरदान देने का फैसला किया। और एक दिन साक्षात भगवान शिव उसके समक्ष प्रकट होकर बोले – “हे भस्मासुर (Bhasmasura) मैं तुम्हारे प्रेम, भक्ति और त्याग से प्रसन्न हूँ। तुम मुझ से वरदान मांग सकते हो। मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ण करूँगा।”

भस्मासुर (Bhasmasura) ने साक्षात भगवान भोले नाथ को अपने सामने देख प्रणाम किया फिर बोला – “हे देवों के देव भगवान महादेव , मुझे ऐसा वरदान दीजिये कि मैं जिस के सिर पर हाथ रखूं वह तुरंत भस्म हो जाए (जल कर मर जाए )।” यह एक बहुत ही विध्वंशक , नकारात्मक सोच से ग्रसित मांग था परन्तु शिव तो अपना वचन दे चुके थे। अतः उनके पास अब कोई विकल्प नहीं था। अतएव उन्हें उसका मांग पुरा करना पड़ा ।

और इस प्रकार भगवान शिव बोले – तथास्तु, जैसा तुमने कहा वही होगा ।

तब भस्मासुर (Bhasmasura) ने कहा, “मुझे कैसे पता चलेगा कि वरदान सत्य है या नहीं अर्थात जिस किसी के सिर पर मैं हाथ दूंगा वो भस्म होगा या नहीं वो कैसे पता चलेगा “।
कृपाकर आप मुझे अपने सिर पर हाथ रख कर वरदान की सत्यता का पता करने दें। ऐसा कहते हुए वह शिव तरफ बढ़ा शिव वहां से भाग गए। भस्मासुर शिव का पीछा करने लगा। शिव देवलोक में जहाँ भी छुपते थे भस्मासुर पीछा करते पहुँच जाता था। अब शिवा परेशान हो गए। समस्त देवलोक में ये बात आग की तरह फ़ैल गयी।
समस्त देव शिव को इस तरह परेशान देखकर भगवन विष्णु के पास गए और उन्हें सारी बात बताए । भगवन विष्णु इस तरह महादेव को परेशान देख उनके लिए कुछ करने का फैसला किए। उन्होंने एक पुजारी का भेष धारण कर भस्मासुर के पास गए।

पुजारी ने भस्मासुर से कहा, “तुम क्यों भाग रहे हो? मुझे बताओ ”।

भस्मासुर (Bhasmasura) ने पुजारी को शिव की तपस्या और वरदान के बारे में सब कुछ विस्तार से बताया।

इस पर पुजारी के भेष में विष्णु भगवान बोले – “भगवान शिव अपनी झूठी वरदान के लिए तुम्हे अपने सिर पर हाथ क्यों रखने देंगे? यदि वह ऐसा करते हैं , तो भेद खुल जाएगा कि वरदान सत्य नहीं है ”।

मेरा कहना मनो ये वरदान झूठी है। तुम वरदान की जांच करना चाहते हो, तो अपने सिर पर हाथ क्यों नहीं रखते हो ? अपने सर पर हाथ रखो अभी पता चल जायेगा कि वरदान गलत है या सही ”

मूर्ख भस्मासुर ने पुजारी रूपी विष्णु भगवन की बात मान कर वरदान की सत्यता जांचने के लिए अपने सिर पर हाथ रखा और पल भर में भस्म हो गया।

इस तरह राक्षस भस्मासुर का अंत हो गया। और भगवन विष्णु ने देवाधिदेव महादेव की सहायता की।

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