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रुद्राक्ष का महत्व, इसका प्रकार और धारण करने की विधि

रुद्राक्ष का महत्व, रुद्राक्ष का प्रकार ,रुद्राक्ष धारण विधि

रुद्राक्ष शब्द की उत्पति दो शब्दों रूद्र और अक्ष से हुई है। रूद्र तो साक्षात् भगवान शिव हैं। भगवान शिव के अनेक नामों में से एक नाम रूद्र भी है। और अक्ष का मतलव होता है अश्रु (आंसू ) होता है। अतः रुद्राक्ष को शिव का स्वरुप माना जाता है। कहा जाता है कि एक बार वर्षों की तपस्या तपस्या में लीन रहने के बाद जब भगवान शिव ने अपनी आंखें खोली तब उनकी आंखों से आंसू की कुछ बूँदें धरती पर गिरा। धरती पर जहां पर शिव के आंसू गिरे, वहां रुद्राक्ष का पेड़ उग गया।

साक्षात् शिव स्वरुप होने के कारण रुद्राक्ष का उपयोग मनुष्य प्राचीन काल से अपने धन, ऐश्वर्य , स्वास्थ्य, सुरक्षा ,शांति, यश, कृति और आध्यात्मिक लाभ के लिए करता आया है। नियम पूर्वक और पूरी श्रद्धा के साथ यदि रुद्राक्ष का धारण किया जाय तो निश्चय ही लाभ कारी सिद्ध होता है ।

रुद्राक्ष धारण करते समय इन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखें।

१. रुद्राक्ष का माला शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करें। चतुर्दशी या शिवरात्रि को धारण करें तो बहुत ही उत्तम अन्यथा किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण किया जा सकता है।

२. रुद्राक्ष का माला हमेशा गले में धारण करें जो ह्रदय तक स्पर्श करता रहे। आप बांये बांह में भी धारण कर सकते हैं यहाँ भी ह्रदय से स्पर्श होता है ।

३. अंगूठी या कमर में कभी भी नहीं धारण करना चाहिए।

४. रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें। तत्पश्चात इसपर चंदन, बिल्वपत्र, पुष्प इत्यादि अर्पित करें और धूप, दीप से आरती करें। इसके बाद रुद्राक्ष को शिवलिंग में स्पर्श करा कर धारण करें।

५. रुद्राक्ष धारण करने के बाद सात्विक और सुद्ध जीवन निर्वाहन करना चाहिए।

यूँ तो रुद्राक्ष कई प्रकार के होता है परन्तु इनमें से इग्यारह प्रकार के रुद्राक्ष विशेष रूप से प्रचलित है।

ये हैं ११ प्रकार के प्रचलित रुद्राक्ष :

१. एक मुखी रुद्राक्ष (1 Mukhi Rudraksh) – ये शिव का स्वरुप है। इसको धारण करने से धन और ऐश्वर्य में वृद्धि होता है।

२. दो मुखी रुद्राक्ष (2 Mukhi Rudraksh) – इसे अर्धनारीश्वर रूप कहा गया है। इसे धारण करने मनुष्य ऐश्वर्यवान होता है और दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।

३. त्रिमुखी रुद्राक्ष  (3 Mukhi Rudraksh) – इसे त्रिलोकी नाथ स्वरुप से तुलना की जाती है। ये बहुत ही मंगल दायक माना गया है।

४. चार मुखी रुद्राक्ष (4 Mukhi Rudraksh) – इसे ब्रम्ह स्वरुप से तुलना की जाती है। ये किसी भी प्रकार के दैहिक दोष से मुक्ति दायक माना जाता है।

५. पांच मुखी रुद्राक्ष (5 Mukhi Rudraksh) – इसे कालाग्नि स्वरुप में इस ब्रह्माण्ड में स्थापित किया गया है | यह रुद्राक्ष पञ्च तत्वों के सभी दोषों को नाश करता है |

६. छः मुखी रुद्राक्ष (6 Mukhi Rudraksh) – इसे भगवान कार्तिकेय स्वरुप माना गया है। ये आर्थिक या व्यावसायिक दोषों से मुक्ति दिलाता है।

७. सात मुखी रुद्राक्ष (7 Mukhi Rudraksh) – इसे कामदेव स्वरुप माना गया है। ये सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान कराने वाला माना गया है।

८. आठ मुखी रुद्राक्ष (8 Mukhi Rudraksh) – इसे विघ्नहरता भगवान गणेश का स्वरुप माना गया है। यह रुद्राक्ष ऋद्धि सिद्धि दायक है।

९. नौ मुखी रुद्राक्ष  (9 Mukhi Rudraksh)– इसे महाशिवपुराण में माता की नौ शक्तियों का प्रतीक माना गया है। इसे धारण करने से सम्पत्ति और यश वृद्धि होती है |

१०. दस मुखी रुद्राक्ष (10 Mukhi Rudraksh) – इसे साक्षात भगवान विष्णु का स्वरुप माना गया है | यह ग्रह, नक्षत्र के बुरे प्रभाव से बचाता है।

११. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष  (11 Mukhi Rudraksh) – इसे साक्षात् हनुमान का स्वरुप माना गया है। इसे धारण करने वालों पर हमेशा हनुमान जी की कृपा बनी रहती है।