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श्री पार्वती माता जी की आरती (Parvati Aarti)

यह श्री पार्वती माता जी (Parvati Aarti) की आरती पुण्य फल दायिनी है। इस कलयुग में भी माता पार्वती की कृपा से प्राणी का उद्धार संभव है।
हिन्दू धर्म में माता पार्वती या माता गौरी प्रेम, सौंदर्य और भक्ति की देवी मानी गयीं हैं। अनेकों नामों से प्रख्यात माता पार्वती सर्वोच्च हिंदू देवी आदि शक्ति स्वरूपा हैं। हिंदू इन्हें मातृ देवी मानते हैं। माता के अलग-अलग गुणों और प्रकृति आधार पर इन्हे अलग नाम के साथ संबोधन किया जाता है, अतएव क्षेत्रीय हिंदू कहानियों में 100 से अधिक नामों से विख्यात हैं। लक्ष्मी और सरस्वती के साथ, वह हिंदू देवी-देवताओं (त्रिदेवी) की त्रिमूर्ति का निर्माण करती हैं।

पार्वती हिंदू भगवान शिव की पत्नी हैं – रक्षक, संहारक (बुराई के) और ब्रह्मांड के सभी जीवन का संचालन में इनका महत्वपूर्ण भूमिका है। वह पर्वत राज हिमवान और रानी मैना की बेटी हैं। पार्वती हिंदू देवताओं गणेश, कार्तिकेय, अशोक सुंदरी की मां हैं। पुराणों में उन्हें विष्णु की बहन बताया गया है।

शिव के साथ, पार्वती शैव संप्रदाय में एक महत्वपूर्ण देवी हैं। हिंदू मान्यता में, वह शिव की ऊर्जा और शक्ति है। प्राचीन भारतीय साहित्य में बड़े पैमाने पर पार्वती का उल्लेख मिलता हैं, और उनकी प्रतिमाएं पूरे दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में हिंदू मंदिरों को सुशोभित है।

श्री पार्वती माता जी की आरती (Parvati Aarti)

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥

जय पार्वती माता

अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।

जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

जय पार्वती माता

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।

देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

जय पार्वती माता

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

जय पार्वती माता

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।

सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

जय पार्वती माता

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।

नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

जय पार्वती माता

देवन अरज करत हम चित को लाता।

गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

जय पार्वती माता

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।

सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

जय पार्वती माता