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चन्द्रघंटा स्वरुप ( Chandraghanta Swarup )

माँ चन्द्रघंटा स्वरुप ( Chandraghanta Swarup ) या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! आप चंद्रघंटा के रूप में हमारी रक्षा के लिए सर्वत्र विराजमान हैं , आप हमारा कोटि कोटि प्रणाम स्वीकार करें । माता दुर्गा के नौ शक्ति रूपों में तीसरी शक्ति स्वरुप चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।

 ब्रह्मचारिणी स्वरुप (Brahmcharini Swarup)

ब्रह्मचारिणी स्वरुप (Brahmcharini Swarup) नवरात्री के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा अर्चना की जाती है। ब्रह्म का मतलव होता है ‘तप’ (तपस्या) और चारिणी का ‘आचरण करने वाली’। इस प्रकार ब्रह्मचारणी का अर्थ है तपस्विनी की आचरण करने वाली। माता के इस स्वरुप में एक हाथ में माला है और दूसरे हाथ में कमंडल है । दधाना

शैलपुत्री स्वरुप (Shailputri Swarup )

 शैलपुत्री स्वरुप (Shailputri Swarup ) वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्‌। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌॥ जगत जननी जगदम्बा माता दुर्गा के पहले स्वरुप “शैलपुत्री ” की पूजा और उपासना नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की बेटी थीं। शैल का अर्थ ‘पर्वत शिखर’ होता है। अतः पर्वत राज की पुत्री होने के कारण माता का यह

नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा (Navratri, Durga Puja, Navdurga)

नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा (Navratri, Durga Puja, Navdurga) नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा माता के विभिन्न नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। जिन नौ रूपों की पूजा की जाती है उसे नवदुर्गा कहा जाता है। नवदुर्गा के नौ रूप जिसे चैत्र माह और अश्विन माह के प्रतिपदा से नवमी तक पूजा जाता है वो क्रमशः निम्नलिखित हैं।

नवरात्रि में दुर्गा पूजा व्रत की सरल विधि

माँ दुर्गा पूजा और व्रत की सरल विधि (Durga Puja Vrat Ki Vidhi) इस संक्षिप्त पूजा और व्रत की विधि (Durga Puja Vrat Ki Vidhi) से भक्त अपने घर में माता की पूजा अर्चना करें । प्रतिपदा यानि पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। ततपश्चात अपने दायीं हथेली पर गंगाजल या जल लेकर निम्नलिखित मन्त्र से स्वयं पर एवं पूजन

बजरंग बाण (Bajarang Baan in Hindi)

बजरंग बाण ( Bajarang Baan in Hindi ) हनुमान के विभिन्न पाठों में बजरंग बाण ( Bajarang Baan in Hindi ) एवम हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ अत्यन्त लोकप्रिय है। आज हम बजरंग बाण के चमत्कारिक प्रभाव और उसके करने की विधि के बारे में जानेंगे। बजरंग बाण हनुमान जी को खुश करने का एक अचूक तरीका है। बजरंग

साईं बाबा की आरती (Sai Baba Aarti in Hindi)

साईं बाबा आरती (Sai Baba Aarti in Hindi) साईं बाबा व्रत कथा का फोटो एवं अन्य सामग्री यहाँ से प्राप्त करें >> गुरुवार को साईं बाबा की पूजा और साईं बाबा कथा के बाद भक्त साई बाबा का आरती (Sai Baba Aarti in Hindi) अवश्य करें। श्रद्धा पूर्वक साईं आरती (Sai  Aarti) करने से साईं का कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।श्रद्धा

श्री साईं बाबा पूजन विधि और साईं बाबा व्रत कथा (Sai Baba Vrat Katha )

सबका मालिक एक श्री साईं बाबा पूजन विधि और  साईं बाबा व्रत कथा (Sai Baba Vrat Katha aur Vidhi ) साईं बाबा के पूजन व साईं बाबा व्रत कथा के लिए गुरुवार का दिन उत्तम है। यह एक ऐसा व्रत है जिसे कोई भी कर सकतें हैं। चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग या महिला या किसी भी जाति के लोग, साईं बाबा

संतोषी माता की शुक्रवार व्रत कथा एवं व्रत विधि (Santoshi Mata Vrat Katha and Vrat Rules)

संतोषी माता की व्रत (Santoshi Mata Vrat) करने एवं संतोषी माता की व्रत कथा (Santoshi Mata Vrat Katha) पढ़ने व सुनने से सुख, शांति, सम्पति, सुहाग सहित अन्य सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। संतोषी माता व्रत की विधि (Santoshi Mata Vrat Rules) संतोषी माता की शुक्रवार व्रत कथा (Santoshi Mata Vrat Katha) प्राचीन काल की बात है, किसी गांव

गणेश जी की आरती – Ganesh Ji ki Aarati

बुधवार का दिन हैं भगवान गणेश की का दिन माना जाता हैं। महादेव एवं पार्वती के प्रिय पुत्र श्री गणेश एक ऐसे देव हैं जिनका महत्व सभी देवों में विशेष माना जाता है जिसके फलस्वरूप किसी भी पूजा से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती हैं। श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। इनकी पूजा करने के बाद

जानें क्यों दूर्वा दल गणेश जी पर अर्पित किया जाता है

किसी समय अनलासुर नामक एक राक्षस रहता था। वह बहुत ही अत्याचारी था। उसने न केवल धरती पर बल्कि स्वर्ग में भी बहुत कहर मचा रखा था । उसने अपनी आँखों से आग निकालता था और उसके रास्ते में जो भी आता उसे नष्ट कर देता था । सभी देवी-देवता भयभीत हो गए और भगवान गणेश से मदद मांगी। भगवान

भगवान गणेश की जन्म कथा

जैसा की हम जानते हैं कि भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान कैलाश पर्वत है । भगवान शिव पर पुरे संसार की जिम्मेदारियाँ हैं। अतः वो अधिकांश समय अपने जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए संसार के भ्रमण पर रहते थे, जबकि पार्वती कैलाश पर अकेली रहा करती थीं। एक दिन जब शिव घर में नहीं थे तो