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श्री बृहस्पतिवार की आरती (Brihaspativar Ki Aarti)

बृहस्पतिवार यानी गुरुवार (Thursday) के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा अर्चना का दिन होता है। इस दिन बृहस्पति देव की विधिवत पूजा से सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। घर में धन-दौलत की कमी नहीं होती है । जल्द और सफल वैवाहिक जीवन के लिए भी गुरुवार का व्रत एवं कथा (बृहस्पति वार

श्री गायत्री चालीसा (Shree Gayatri Chalisa)

श्री गायत्री चालीसा (Shree Gayatri Chalisa) का पाठ  माता गायत्री को प्रसन्न करने का सरल मार्ग है। ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’ अर्थात गायत्री माता त्रिगुणात्मिका हैं इनमें त्रिगुण सत , रज और तम समाहित है अर्थात ये सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं। समस्त ज्ञान की अधिष्ठात्री गायत्री हैं। गायत्री माता के पांच मुख हैं, ये कमल

गणेश पूजा से प्रारम्भ की जाती है कोई भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान

कोई शुभ कार्य का प्रारम्भ गणेश से होती है – क्या आप ने कभी सोचा है कि लोग कोई काम प्रारंभ करने से पहले भगवान विघ्नहर्ता गणेश का नाम क्यों लेते हैं? किसी और देवता का नाम लेने से पहले लोग गणेश को स्मरण करते हैं। किसी भी देवी व देवता के पूजा या आराधना करने से पहले गणेश की

श्री राम वंदना : भए प्रगट कृपाला (Shri Ram Vandana : Bhaye Pragat Kripala)

त्रेतायुग में भगवान विष्णु के राम के रूप में पृथ्वी पर प्रगट होने के क्षण का विवरण तुलसी कृत रामचरित मानस में छंद के रूप में किया गया है। इस पवित्र राम वंदना :भए प्रगट कृपाला (Ram Vandna: Bhaye Pragat Kripala) का पाठ करने से प्राणी के मन में अद्भुत निर्मलता का संचार होता है। उसका काया निर्मल होता है।

श्री कुबेर चालीसा (Sri Kuber Chalisa in Hindi)

कुबेर ‘धन के स्वामी ‘ और ‘यक्ष के राजा’ हैं। यह धन, समृद्धि, यस और ऐश्वर्य का सच्चा प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान कुबेर न केवल धन वितरण के मालिक हैं, अपितु ब्रह्मांड के सभी खजाने का संयोयक एवं संरक्षक हैं। इसलिए, धन एवं ऐश्वर्य के लिए उनकी पूजा किया जाता है। धन की मनोकामना से कुबेर की पूजा की परंपरा

संकटमोचन हनुमान अष्टक और इसके लाभ (Sankat Mochan Hanuman Ashtak and Benefits)

संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankat Mochan Hanuman Ashtak ), जैसा की नाम से ही स्पष्ट है यह पाठ सभी प्रकार संकट को दूर करने में सक्षम है। हनुमान साक्षात देव हैं। श्री हनुमान भगवान शिव के ग्यारहवाँ रूद्र अवतार हैं। यह शीघ्र प्रसन्न होते है। यह संकटमोचन, विघ्न-विनाशक हैं। संकटमोचन हनुमान अष्टक पाठ के निम्नलिखित फायदे हैं । (Benefits of Sankat Mochan

सिद्धिदात्री स्वरुप (Siddhidatri Swarup)

सिद्धिदात्री स्वरुप (Siddhidatri Swarup) नवरात्रि के नवमें दिन देवी के सिद्धिदात्री स्वरुप की आराधना की जाती है। नवदुर्गा का यह रूप अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। इन्ही माता कृपा से भगवान भोले नाथ सिद्धि प्राप्त कर अर्धनारीश्वर रूप धारण किये थे । और संसार में शिव अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त कर सके । माता

महागौरी स्वरुप (Mahagauri Swarup)

महागौरी स्वरुप (Mahagauri Swarup) नवरात्रि के आठवें दिन देवी के महागौरी स्वरुप की पूजा की जाती है। नवदुर्गा का यह रूप अमोघ फलदायिनी है। जैसा की नाम से ही स्पष्ट है माता अपने इस रूप में गौर वर्ण की हैं। इनकी वर्ण की तुलना शंख , स्वेत कुंद की पुष्प व चन्द्रमा से की जाती है। श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः

कालरात्रि स्वरुप (Kalratri Swarup)

कालरात्रि स्वरुप (Kalratri Swarup) नवरात्रि में सातवें दिन माँ नवदुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा और अर्चना का विधान है। देवी कालात्रि माता काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के अनेक रूपों में से एक स्वरुप माना जाता है। ये रौद्री और धुमोरना देवी के नाम से भी जानी जाती है | जैसा की स्पष्ट है ये घने

कात्यायनी स्वरुप (Katyayani Swarup)

कात्यायनी स्वरुप (Katyayani Swarup) चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन । कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥ नवरात्रि में छठवें दिन माँ नवदुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा और अर्चना की जाती हैं। कात्यायन महर्षि के पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारन माता कात्यायनी कहलायी। माँ के सी स्वरूप में चार भुजाऐं हैं जो अस्त्र शस्त्र और कमल पुष्प से सुसज्जित है। कात्यायनी स्वरूप

स्कंदमाता स्वरुप (Skandmata Swarup)

स्कंदमाता स्वरुप (Skandmata Swarup) नवरात्रि के पाँचवें दिन स्कंदमाता स्वरुप की पूजा और उपासना किया जाता है। यह माता अपने भक्तों की समस्त मनोकामना पूरा करती हैं। इनके भक्त इस संसार के आवागमन मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया | शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी || चार भुजाओं वाली स्कंदमाता के दोनों ऊपर वाली भुजाओं में कमल पुष्प

कूष्माण्डा स्वरुप (Kushmanda Swarup)

कूष्माण्डा स्वरुप (Kushmanda Swarup) सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे। नवरात्रि के चतुर्थी यानी चौथा दिन माता कुष्मांडा की पूजन की जाती है। देवी के इस स्वरुप को आदिशक्ति कहा गया है। माता अपनी मंद मंद दैविक मुस्कान से इस अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड का निर्माण की हैं इसी कारण इस रूप को कूष्माण्डा कहा जाता है। जब हर तरफ