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नंदी ने शिव और पार्वती का मिलन कराया

नंदी ने शिव और पार्वती का मिलन कराया (Nandi marries Shiva and Parvati)

कैलाश पर्वत पर भगवन महादेव अपनी अर्धांगनी पार्वती देवी को वेद की महात्म्य बता रहे थे जो बर्षों तक चलता रहा। इसी दौरान एक दिन पार्वती देवी की एकाग्रता कुछ छण के लिए टूट गयी। इस पर भगवन भोलेनाथ क्रोधित हो गए और क्रोध में उन्होने पार्वती से कहा – तुम मृत्युभुवन यानि पृथ्वी जाओ और मछुआरे के घर जन्म ले लो।

देवी पार्वती ने पूछा – हे त्रिभुवन नाथ मुझ से क्या गलती हो गयी। परन्तु महादेव कुछ नहीं बोले।

देवी पार्वती मृत्यु लोक के लिए प्रस्थान कर गई।

इधर भगवान भोले नाथ पार्वती के वियोग में निराश रहने लगे। भगवान का ये दुख उनके परम भक्त नंदी से देखा नहीं जा रहा था। ओ सोचने लगा कि क्या करूँ जो भगवान के प्रिय भार्या पार्वती कैलाश लौट आयें।

इस दौरान पार्वती पृथ्वी जाकर एक छोटी सी बच्ची का रूप धारण कर लिया। उस बच्ची पर एक मछुआरे का नजर पड़ा। मछुआरे ने बच्ची को अपने साथ अपने घर ले कर गया और अपनी पत्नी को बताया। पत्नी बच्ची पाकर बहुत खुश हुई। दोनों मिलकर बच्ची को अपनी बेटी के रूप में पालने लगाऔर उसका नाम पार्वती रख दिया। समय गुजरते गए और अब पार्वती एक परम सुंदरी, गुणवती, तेजस्वी युवती बन गई। वह अपने पिता के साथ प्रति दिन मछली पकड़ने जाती थी। उस गांव में सबसे ज्यादा मछली पार्वती पकड़ती थी।

इधर कैलाश में भगवान शिव अपनी पत्नी के लिए हर पल निराश रहते थे। नंदी को देखा नहीं जाता था। एक दिन नंदी पूछा भगवन से आप माता पार्वती को क्यों नहीं बुला लेते है?

भगवान महादेव बोले – उसके जन्म के अनुसार उसकी शादी एक मछुआरे से होना है। यही उसके भाग्य में है।

यह सुनते ही नंदी ने शिव पार्वती को मिलाने का एक योजना बनाया। उसने एक विशाल मछली का रूप धारण किया। और समुद्र में उस स्थान पर गया जहाँ मछुआरे मछली पकड़ते थे। वो सभी मछुआरे को परेशान करने लगे। मछुआरे परेशान होकर एक सभा की। सभा में निर्णय हुआ कि जो भी कोई उस बड़ी मछली को पकड़ लेगा उसके साथ पार्वती की शादी कर दी जाएगी।
कई मछुआरे ने कोशिश की परन्तु सभी नाकाम रहे उस बड़ी मछली को पकड़ने में।

अंत में निराश होकर मछुआरे ने शिव जी की आराधना की और शिव जी से कहा – हे प्रभु मुझे इस बड़ी मछली से छुटकारा पाने में सहायता करो। पार्वती ने भी विनती की और बोली हे महादेव हमारी सहायता के लिए आओ।

भगवान भोले नाथ ने पार्वती की प्रार्थना पर तुरंत ही एक सुन्दर युवा मछुआरे का रूप धारण कर बड़ी मछली को पकड़ने आ गए। वह मछुआरे से बोले में पकड़ लूंगा इस मछली को। भगवान शिव को देख नंदी खुश हुआ। और भगवन शिव मछली पकड़ लिए।

इस तरह फिर भोलेनाथ और पार्वती नंदी के प्रयास से एक हो गए।