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जानें क्यों दूर्वा दल गणेश जी पर अर्पित किया जाता है

किसी समय अनलासुर नामक एक राक्षस रहता था। वह बहुत ही अत्याचारी था। उसने न केवल धरती पर बल्कि स्वर्ग में भी बहुत कहर मचा रखा था । उसने अपनी आँखों से आग निकालता था और उसके रास्ते में जो भी आता उसे नष्ट कर देता था ।

सभी देवी-देवता भयभीत हो गए और भगवान गणेश से मदद मांगी। भगवान गणेश ने सभी को आश्वासन दिया कि वह दानव को मार देंगे और पृथ्वी व स्वर्ग में शांति स्थापित करेंगे।

युद्ध के मैदान में अनलासुर ने आग के गोले से भगवान गणेश पर प्रहार शुरू कर दिया। जवाब में, भगवान गणेश ने अपना ‘विराट रूप’ धारण किया और दानव को मार गिराया।

दैत्य अनला सुर का वध करने के बाद, भगवान गणेश अपने शरीर के अंदर की गर्मी के कारण बेहद असहज महसूस कर रहे थे। चंद्रदेव भगवान गणेश की मदद के लिए आए और गणेश के सिर पर खड़े हो गए और इसलिए भगवान गणेश को ‘भालचंद्र’ के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। यहाँ तक कि भगवान विष्णु ने भी भगवान गणेश के शरीर की गर्मी को कम करने के लिए अपना कमल दिया, परन्तु उससे भी कोई लाभ नहीं हुआ।

अंत में, साधु गण 21 दुर्वा दल (एक प्रकार का घास ) के साथ वहां पहुंचे और उन्होंने भगवान गणेश के सिर पर दूर्वा दल रखा और चमत्कारिक रूप से, गर्मी दूर हो गई। भगवन इस दूर्वा दाल के चमत्कार से बहुत प्रसन्न हुए उसी दिन से भगवान गणेश ने घोषणा की कि जो कोई भी दूर्वा दल उन पर अर्पित करेगा, उस पर भगवान गणेश की कृपा सदा बनी रहेगी। उस दिन से भगवान गणेश की पूजा दूर्वादल से की जाने लगी ।

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