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Category: Stotra

श्री शङ्कराचार्य विरचित – अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र

शिव बिना शक्ति के शव समान है। शिव और शक्ति एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जिस प्रकार सूर्य और प्रकाश अलग नहीं किया जा सकता वैसे ही शिव और शक्ति को अलग नहीं किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार शिवा और शक्ति एक दूसरे के बिना शक्तिहीन हैं। इस अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र / स्तुति की करने से शिव-शक्ति की

श्रीविष्णुसहस्रनाम : विष्णु के एक हजार नाम (Vishnu Sahashranamam : 1000 Names of Lord Vishnu)

श्रीविष्णुसहस्रनाम (Vishnu Sahashranamam ) भगवान विष्णु के एक हजार नाम (1000 Names of Lord Vishnu) का अनमोल संग्रह है जिसका प्रति दिन पाठ मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कराता है। विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र हिन्दू के महान महाकाव्य महाभारत के 149 वें अध्याय के अनुषासनिक परवम् में उद्धृत है। महान पराक्रमी भीष्म पितामह ने पंच पांडवों

शंकराचार्यरचित वेदसारशिवस्तोत्रम : पशूनां पतिं पापनाशं (Vedsarshivstotram)

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित वेदसारशिवस्तोत्रम् : पशूनां पतिं पापनाशं (Vedsarshivstotram: Pashunan Patin Paap Nashan) मनुष्य के जीवन में समस्त सुख दिलानेवाला शिव स्तोत्र है। आदि शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार माने जाते है अतः उनके द्वारा रचना की गयी ये स्तोत्र साक्षात् भगवन शंकर द्वारा दिया गया सम्पूर्ण सुखों की प्राप्ति का मन्त्र माना जाता है। आज के भाग दौर

शिव दारिद्रय दहन स्तोत्र (Shiv Daridray Dahan Stotra)

हर युग में चाहे सतयुग हो या कलयुग, लोगों के बीच आर्थिक असामनताऐं पाई जाती रही है। और हमेशा से गरीबी को एक अभिशाप के रूप में देखा जाता है। हर युग में देवता से लेकर ऋषि मुनि तक गरीबी दूर करने के कोशिश करते रहे हैं। इसी क्रम में भगवान राम के कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ जी ने शिव

शिवयजुर्मन्त्र (Shivayajurmantra)

चाहे कोई भी पूजा , अभिषेक, या जागरण हो। यह चाहे घर में हो या मंदिर में हो। किसी भी देवी देवता का हो परन्तु एक मंत्र के बिना आरती पूर्ण नहीं माना जाता है वह है कर्पूरगौरं करुणावतारम् ( karpur gauram karunavtaram)। महादेव का यह स्तोत्र शिव पार्वती के विवाह के अवसर पर स्वयं भगवान विष्णु द्वारा गाया गया

शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam)

शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam) स्तोत्र में भगवान विष्णु के सम्पूर्ण स्वरुप का वर्णन है। इस श्लोक का नित्य पाठ करने से मनुष्य पर भगवन विष्णु की कृपा बानी रहती है। शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam) शान्ताकारं भुजग शयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगन-सदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमल-नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् (योगिभिर ध्यान गम्यम्) वन्दे विष्णुं भवभय-हरं सर्वलोकैक-नाथम्॥ शान्ताकारं – जो अति सौम्य

रावण रचित शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram)

शिव ताण्डव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) की रचना महान पराक्रमी, महान पंडित एवं शिव के अनन्य भक्त लंकाधिपति रावण द्वारा किया गया है। एक बार रावण ने भगवान शिव के कैलाश पर्वत को ही उठा कर लंका ले जाने लगा। तब महादेव शिव ने अपने अंगूठे से थोड़ा दबा दिया तो कैलाश अपने जगह पर पुनः अवस्थित हो गया। और

श्री राम वंदना : भए प्रगट कृपाला (Shri Ram Vandana : Bhaye Pragat Kripala)

त्रेतायुग में भगवान विष्णु के राम के रूप में पृथ्वी पर प्रगट होने के क्षण का विवरण तुलसी कृत रामचरित मानस में छंद के रूप में किया गया है। इस पवित्र राम वंदना :भए प्रगट कृपाला (Ram Vandna: Bhaye Pragat Kripala) का पाठ करने से प्राणी के मन में अद्भुत निर्मलता का संचार होता है। उसका काया निर्मल होता है।

संकटमोचन हनुमान अष्टक और इसके लाभ (Sankat Mochan Hanuman Ashtak and Benefits)

संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankat Mochan Hanuman Ashtak ), जैसा की नाम से ही स्पष्ट है यह पाठ सभी प्रकार संकट को दूर करने में सक्षम है। हनुमान साक्षात देव हैं। श्री हनुमान भगवान शिव के ग्यारहवाँ रूद्र अवतार हैं। यह शीघ्र प्रसन्न होते है। यह संकटमोचन, विघ्न-विनाशक हैं। संकटमोचन हनुमान अष्टक पाठ के निम्नलिखित फायदे हैं । (Benefits of Sankat Mochan

बजरंग बाण (Bajarang Baan in Hindi)

बजरंग बाण ( Bajarang Baan in Hindi ) हनुमान के विभिन्न पाठों में बजरंग बाण ( Bajarang Baan in Hindi ) एवम हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ अत्यन्त लोकप्रिय है। आज हम बजरंग बाण के चमत्कारिक प्रभाव और उसके करने की विधि के बारे में जानेंगे। बजरंग बाण हनुमान जी को खुश करने का एक अचूक तरीका है। बजरंग

दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra)

दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra) शनि ग्रह, साढ़े साती या शनि ढैया चाहे किसी भी प्रकार का शनि की दशा या महादशा हो इस दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra) का प्रत्येक शनिवार कम से कम 11 वार पाठ करना चाहिए। इस स्तोत्र की रचना स्वयं महाराजा दशरथ ने अपने ऊपर शनि के प्रभाव को कम

एक श्लोकी रामायण (Ek Shloki Ramayana) – दो पंक्ति के श्लोक में सम्पूर्ण रामायण

एक श्लोकी रामायण (Ek Shloki Ramayana) इस दो पंक्ति के श्लोक के पाठ करने से सम्पूर्ण रामायण के पाठ का फल प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथो में रामायण का एक विशिष्ट स्थान है। इसमें प्रभु श्री राम की जीवन लीलाओं का वर्णन किया गया है। साक्षात भगवान विष्णु पृथ्वी पर मनुष्य योनि में प्रभु श्री राम के