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Category: Chalisa

श्री गायत्री चालीसा (Shree Gayatri Chalisa)

श्री गायत्री चालीसा (Shree Gayatri Chalisa) का पाठ  माता गायत्री को प्रसन्न करने का सरल मार्ग है। ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’ अर्थात गायत्री माता त्रिगुणात्मिका हैं इनमें त्रिगुण सत , रज और तम समाहित है अर्थात ये सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं। समस्त ज्ञान की अधिष्ठात्री गायत्री हैं। गायत्री माता के पांच मुख हैं, ये कमल

श्री कुबेर चालीसा (Sri Kuber Chalisa in Hindi)

कुबेर ‘धन के स्वामी ‘ और ‘यक्ष के राजा’ हैं। यह धन, समृद्धि, यस और ऐश्वर्य का सच्चा प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान कुबेर न केवल धन वितरण के मालिक हैं, अपितु ब्रह्मांड के सभी खजाने का संयोयक एवं संरक्षक हैं। इसलिए, धन एवं ऐश्वर्य के लिए उनकी पूजा किया जाता है। धन की मनोकामना से कुबेर की पूजा की परंपरा

श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa)

श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa) हिन्दू धर्म में सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है की इनकी पूजा से मनुष्य को यस, मान समान, धन, पुत्र आदि की मनोकामना पूरी होती है। ये समस्त जगत के प्राणी के ऊर्जा का स्रोत हैं। सूर्य की आराधना में श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa) का पाठ अवश्य करना चहिये। प्रत्यक्ष

श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa)

श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa) जब भी पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा है भगवान विष्णु धरातल पर जीव रक्षा या यूँ कहें की धर्म रक्षा के लिए अवतरित हुए हैं। भगवान् विष्णु के सभी अवतारों में सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्री राम अवतार और श्री कृष्ण अवतार माना गया है। श्री कृष्ण अवतार द्वापर युग में हुआ था। जो व्यक्ति अपने

श्री काली चालीसा (Shri Kali Chalisa)

श्री काली चालीसा (Shri Kali Chalisa) काली चालीसा (Kali Chalisa) माता काली को खुश करने का एक सरल साधन हैं। माता काली रूप भगवती के शक्तिशाली रूपों में से एक है। काली चालीसा को प्रति दिन पाठ करने से भय दूर होता है, बुद्धि तीव्र होती है, शत्रु का विनाश होता है और कष्ट ख़त्म होता हैं। काली माता का आध्यात्मिक

विष्णु चालीसा( Vishnu Chalisa)

विष्णु चालीसा( Vishnu Chalisa) भगवान विष्णु जगत के पालन कर्ता हैं। कहा जाता है की इनकी कृपा दृष्टि जिस पर भी परता वो प्राणी इस संसार के सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। जब जब इस धरती पर कोई संकट आया है लक्ष्मीपति किसी न किसी रूप में आकर बचाया है। ऐसे प्रभु नारायण का विष्णु चालीसा (Vishnu Chalisa)

संतोषी माता की चालीसा (Santoshi Mata Chalisa)

संतोषी माता की चालीसा (Santoshi Mata Chalisa) संतोषी माता का व्रत उत्तर भारत में बहुत प्रचलित है। यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है। कहा जाता है कि संतोषी माता को भगवान गणेश की पुत्री हैं। ऐसा मान्यता है की संतोषी माता अपने भक्तो की सभी परेशानी दूर करती हैं। संतोषी माता की चालीसा  (Santoshi Mata Chalisa) का पाठ करने

श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa)

श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa) श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं। किसी भी पूजा, अनुष्ठान, या यज्ञ के प्रारम्भ में श्री गणेश की पूजा की जाती है जिससे उसमें किसी भी प्रकार की विघ्न नहीं आती है । ये विघ्नहर्ता हैं अर्थात किसी भी विघ्न बाधा को दूर कर मनुष्य का कल्याण करते हैं। श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa)

श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa)

श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa) भगवन विष्णु ने अपने राम अवतार के माध्यम से पृथ्वी पर मनुष्य के लिए एक महान जीवन का मर्यादा स्थापित किया है। इसलिए भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम (Maryada Purushottam) कहा जाता है। इस राम चालीसा (Ram Chalisa) का पाठ कर भक्त उनके महान जीवन गाथा को याद कर सकता है और पुण्य का

श्री साँई चालीसा ( Shri Sai Baba Chalisa)

श्री साँई चालीसा (Shri Sai Baba Chalisa) साईं बाबा सिरडीह वाले श्रद्धा-सबुरी के साथ आगे बढ़ते गए भक्त जुड़ते गए। क्या अलौकिक शक्ति था इस बाबा में कि जो भी भक्त एक बार श्रद्धा पूर्वक याद किया, उसके सभी कष्ट दूर हो गए और मन में परम सुख की अनुभूति होने लगी। बाबा के वचन ही उनके भक्तों के लिए

श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa)

श्री शिव चालीसा – Shri Shiv Chalisa हमारे हिन्दू धर्म में भगवान शिव एक ऐसे देव हैं जो सभी विघ्न बाधाओं से अपने अपन भक्तो को दूर रखते हैं। शास्त्र के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेव हैं जो क्रमशः संसार के रचयिता, संचालक और संहारक हैं। शिव के भक्तों को मृत्य का भय नहीं सताता। प्रति दिन शिव चालीसा

श्री सरस्वती चालीसा (Shri Saraswati Chalisa)

श्री सरस्वती चालीसा – Shri Saraswati Chalisa सरस्वती माता को हिन्दू धर्म में विद्या , बुद्धि , और ज्ञान की देवी माना गया है। स्वयं भगवान भी माता की आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इनकी आराधन किया करते है। इन्हे वाग्देवी कहा जाता है। माता सरस्वती अपने हाथ में विणा और पुस्तक का धारण किये हुए है। इनको स्वेतवर्ण बहुत