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भगवान गणेश की जन्म कथा

जैसा की हम जानते हैं कि भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान कैलाश पर्वत है । भगवान शिव पर पुरे संसार की जिम्मेदारियाँ हैं। अतः वो अधिकांश समय अपने जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए संसार के भ्रमण पर रहते थे, जबकि पार्वती कैलाश पर अकेली रहा करती थीं।

एक दिन जब शिव घर में नहीं थे तो माता पार्वती को स्नान करने जाना था और उन्हें लगा की इस समय कोई घर में आ गया तो परेशानी होगी। अतः माता पार्वती ने हल्दी से एक बालक का निर्माण किया और उस बालक का नाम गणेश रखा। बालक गणेश अपनी माता का परम आज्ञाकारी पुत्र था। माता पार्वती ने बालक गणेशा को घर की रखवाली करने की आदेश देकर स्नान करने चली गयीं। इसी बीच भगवान शिव अपने घर आये और जैसे ही घर में प्रवेश करने लगे उन्हें बालक गणेश रोक दिया । भगवान महादेव इस तरह एक अनजान बच्चे द्वारा अपने ही घर में प्रवेश करने से रोके जाने पर अचंभित हुए। उन्हें बहुत समझाया, परन्तु बालक एक भी नहीं सुना। इसके बाद शिव अपने गण को कहे इस बच्चे को यहाँ से भगाओ। शिव की सारी सैन्य अकेले बालक गणेश से पराजित हो गया। शिव अपने उग्र स्वभाव के लिए प्रसिद्ध हैं। अब वो बहुत क्रोधित हो गए और इस क्रोध के कारण अपने आप से नियंत्रण खो दिए। और बालक गणेश का अपने त्रिशूल से गला काट दिए। और अपने उग्र रूप में ही मृत शरीर के चारो ओर परिक्रमा करने लगे।

जब पार्वती बाहर निकलीं और उनहोंने गणेश के मृत शरीर को देखा, तो उनके रोष की कोई सीमा नहीं थी। वह शिव पर भड़क उठी और उनके इस कृत के परिणामस्वरूप पूरे ब्रह्मांड को नष्ट करने की धमकी दी। अब, ब्रह्मा, विष्णु और शिव पर पुरे ब्रह्मांड की जिम्मेदारी थी। ब्रह्मा ने पार्वती के क्रोध को देखा और ब्रह्माण्ड को नष्ट नहीं करने की सलाह देते हुए, शिव की ओर से उनसे क्षमा मांगी। पार्वती ने इस शर्त पर मानने को तैयार हुई कि गणेश का जीवित किया जाय और उन्हें प्रथम देव के रूप में पूजा जाय। शिव ने भी, अपने क्रोध में हुई गलती का एहसास किया और पार्वती से माफी मांगी। शिव ने अपने गण को आदेश दिया कि संसार में जो भी प्राणी अभी पहले जन्म ले उसका सिर लेकर आओ। संयोग से एक हथनी तभी एक हाथी को जन्म दिया। शिवगण उसी का सिर लेकर आ गए। शिव ने उसी हाथी का सिर गणेश के कटे हुए सिर के जगह रख कर उसको जीवित किया और उसे भी अपने पुत्र के रूप में स्वीकार किया। इस प्रकार गणेश का जन्म हुआ और अब वो प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजे जाते हैं।

Ganesh Chalisa