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आरती श्री सूर्य जी (Aarti Shri Surya Dev Ji )

भगवान सूर्य को ब्रह्मांड का निर्माता और जीवन का स्रोत माना जाता है। ये संसार को प्रकाश और गर्मी देने का कार्य करते है। रविवार को इनकी पूजा कर इनकी विशेष कृपा प्राप्त किया जा सकता है। अतएव प्रत्येक रविवार को सूर्य चालीसा पाठ कर  श्री सूर्य जी के आरती (Aarti Shri Surya Dev Ji ) का पाठ करना चाहिए। सूर्य को कई अन्य नामों से जाना जाता है, जिसमें विवस्वत, सावित्र, भास्कर , दिनकर, लोकसुख (विश्व की आंख), ग्राहजा (नक्षत्रों का राजा) , और सहस्र-किरण (एक हजार किरणों का) शामिल हैं। सूर्य देवता का जिक्र ऋग्वेद में किया गया है , जो वेदों के सबसे पवित्र ग्रंथों में से सबसे पुराना है और इसकी रचना 1500 और 1000 ईसा पूर्व के बीच हुई है।

आरती श्री सूर्य जी (Aarti Shri Surya Dev Ji )

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली।

अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

सकल – सुकर्म – प्रसविता, सविता शुभकारी।

विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।

वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।

हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।