Category

Month: July 2019

शंकराचार्यरचित वेदसारशिवस्तोत्रम : पशूनां पतिं पापनाशं (Vedsarshivstotram)

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित वेदसारशिवस्तोत्रम् : पशूनां पतिं पापनाशं (Vedsarshivstotram: Pashunan Patin Paap Nashan) मनुष्य के जीवन में समस्त सुख दिलानेवाला शिव स्तोत्र है। आदि शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार माने जाते है अतः उनके द्वारा रचना की गयी ये स्तोत्र साक्षात् भगवन शंकर द्वारा दिया गया सम्पूर्ण सुखों की प्राप्ति का मन्त्र माना जाता है। आज के भाग दौर

शिव दारिद्रय दहन स्तोत्र (Shiv Daridray Dahan Stotra)

हर युग में चाहे सतयुग हो या कलयुग, लोगों के बीच आर्थिक असामनताऐं पाई जाती रही है। और हमेशा से गरीबी को एक अभिशाप के रूप में देखा जाता है। हर युग में देवता से लेकर ऋषि मुनि तक गरीबी दूर करने के कोशिश करते रहे हैं। इसी क्रम में भगवान राम के कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ जी ने शिव

शिवयजुर्मन्त्र (Shivayajurmantra)

चाहे कोई भी पूजा , अभिषेक, या जागरण हो। यह चाहे घर में हो या मंदिर में हो। किसी भी देवी देवता का हो परन्तु एक मंत्र के बिना आरती पूर्ण नहीं माना जाता है वह है कर्पूरगौरं करुणावतारम् ( karpur gauram karunavtaram)। महादेव का यह स्तोत्र शिव पार्वती के विवाह के अवसर पर स्वयं भगवान विष्णु द्वारा गाया गया

शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam)

शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam) स्तोत्र में भगवान विष्णु के सम्पूर्ण स्वरुप का वर्णन है। इस श्लोक का नित्य पाठ करने से मनुष्य पर भगवन विष्णु की कृपा बानी रहती है। शान्ताकारं भुजग शयनं (Shantakaram Bhujagashayanam) शान्ताकारं भुजग शयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगन-सदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमल-नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् (योगिभिर ध्यान गम्यम्) वन्दे विष्णुं भवभय-हरं सर्वलोकैक-नाथम्॥ शान्ताकारं – जो अति सौम्य

श्री बांके बिहारी की आरती (Banke Bihari Ki Aarti)

श्री बांके बिहारी की आरती (Banke Bihari Ki Aarti) करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है। आरती से पहले बांके बिहारी के बारे में संक्षिप्त विवरण उद्धृत है। जाने अपने पूज्य बांके बिहारी के बारे में। श्री बांके बिहारी मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पवित्र शहर वृंदावन में भगवान कृष्ण को समर्पित है। बांके बिहारी मंदिर की स्थापना

देवशायनी एकादशी (Devshayani Ekadashi)

देवशायनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी तिथि को देवशायनी या हरिशायनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार सारे व्रतों में एकादशी व्रत का एक विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक विश्राम के लिए चले जाते हैं और

आरती अहोई माता की (Ahoi Mata Ki Aarti)

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु और उसको किसी अनहोनी से बचाने की कामना करती हैं। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करके निर्जला व्रत रखती हैं। इस पवित्र व्रत पूजा में अहोई माता की कथा एवं आरती (Ahoi Mata Ki Aarti) जरूर