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Month: June 2019

रावण रचित शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram)

शिव ताण्डव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) की रचना महान पराक्रमी, महान पंडित एवं शिव के अनन्य भक्त लंकाधिपति रावण द्वारा किया गया है। एक बार रावण ने भगवान शिव के कैलाश पर्वत को ही उठा कर लंका ले जाने लगा। तब महादेव शिव ने अपने अंगूठे से थोड़ा दबा दिया तो कैलाश अपने जगह पर पुनः अवस्थित हो गया। और

श्री पार्वती माता जी की आरती (Parvati Aarti)

यह श्री पार्वती माता जी (Parvati Aarti) की आरती पुण्य फल दायिनी है। इस कलयुग में भी माता पार्वती की कृपा से प्राणी का उद्धार संभव है। हिन्दू धर्म में माता पार्वती या माता गौरी प्रेम, सौंदर्य और भक्ति की देवी मानी गयीं हैं। अनेकों नामों से प्रख्यात माता पार्वती सर्वोच्च हिंदू देवी आदि शक्ति स्वरूपा हैं। हिंदू इन्हें मातृ

आरती श्री वैष्णो देवी (Aarti Vaishno Devi)

माता वैष्णो देवी हिन्दू धर्म में महान शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं। ये अनेक नामों से जानी जाती हैं उसमें माता रानी , त्रिकुटा , वैष्णवी इत्यादि प्रसिद्ध नाम है। वैष्णो देवी मंदिर, भारत के जम्मू और कश्मीर में वैष्णो देवी की पहाड़ी पर समुद्र तल से 5,200 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह हिन्दू का एक

श्री रामायणजी की आरती (Ramayan Aarti)

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से है। उनके जीवन चरित्र पर आधारित है हिन्दू धर्म के पवित्र धर्म ग्रन्थ रामायण। इसी पवित्र हिन्दू ग्रन्थ से यह श्री रामायणजी की आरती (Ramayan Aarti) लिया गया है। भगवान विष्णु त्रेतायुग में श्री राम के रूप में पृथ्वी पर अयोध्या के राजा जनक के पुत्र के

श्री तुलसी जी की आरती (Tulsi Aarti)

हिंदू धार्मिक परंपरा में तुलसी के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व है। हिन्दू के हर घर के आँगन में तुलसी का पवित्र पौधा रहता है जिसे वह सुबह शाम पूजा करते हैं। ‘तुलसी’ नाम का अर्थ “अतुलनीय ” है। इन्हे अतुलनीय देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में इस श्री तुलसी जी की आरती (Tulsi Aarti) का पाठ

आरती श्री गंगा जी (Ganga Aarti)

हिन्दू धर्म में गंगा नदी को एक देवी का दर्जा प्राप्त है लोग इन्हें गंगा माता व गंगा मैया के नाम से जानते हैं। गंगा माता सभी पापों को नष्ट कर, मनुष्य को मोक्ष के द्वार तक पहुंचती हैं । ऐसे माता का आरती करना मनुष्य के लिए सौभाग्य की बात है। इस गंगा माता आरती (Ganga Aarti) का पाठ