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Month: May 2019

आरती युगलकिशोर की कीजै (Aarti Yugal Kishoreki Keejai)

श्री राधाकृष्ण के संयुक्त रूप को युगलकिशोर कहा जाता है। युगल का प्रयोग जोड़ा (couple ) के लिए किया जाता है। श्री राधाकृष्ण के संयुक्त स्वरुप का आराधना करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है। साक्षात् नारायण द्वापर युग में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने लीला के माध्यम से पृथ्वी के प्राणी को सच्चे प्रेम का अर्थ बताया था। राधाकृष्ण

आरती श्री दुर्गाजी – अम्बे तू है जगदम्बे काली (Durga Aarti -Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)

हिन्दू धर्म में माता दुर्गा की पूजा या आराधना का विशेष महत्व है। ये सभी मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रसस्त हैं। जैसा की हम जानते हैं भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं एवं विभिन्न स्तुति, चालीसा, मन्त्र, आरती इत्यादि का पाठ करते हैं। ऐसे में इस “आरती श्री दुर्गाजी – अम्बे तू है जगदम्बे काली

आरती श्री सूर्य जी (Aarti Shri Surya Dev Ji )

भगवान सूर्य को ब्रह्मांड का निर्माता और जीवन का स्रोत माना जाता है। ये संसार को प्रकाश और गर्मी देने का कार्य करते है। रविवार को इनकी पूजा कर इनकी विशेष कृपा प्राप्त किया जा सकता है। अतएव प्रत्येक रविवार को सूर्य चालीसा पाठ कर  श्री सूर्य जी के आरती (Aarti Shri Surya Dev Ji ) का पाठ करना चाहिए।

शिरडी वाले साईं बाबा की जीवन कथा(shirdi wale sai baba ki jeevan katha)

शिरडी वाले साईं बाबा की जीवन कथा ( shirdi wale sai baba ki jeevan katha) शिरडी वाले साईं बाबा की जीवन कथा(shirdi wale sai baba ki jeevan katha) बड़ा ही रोचक और चमत्कार से भरा था। शिरडी के श्री साईं बाबा सभी के है। इनके दरबार में अमीर, गरीब और सभी जात -धर्म के लोग एक सामान है। शिर्डी को हिंदुओं

मोहिनी एकादशी व्रत के नियम (Mohini Ekadashi Vrat Vidhi )

मोहिनी एकादशी व्रत के नियम (Mohini Ekadashi Vrat Vidhi ) वैशाख मास के शुक्लपक्ष के एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाय जाता है। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत (Mohini Ekadashi Vrat) रख कर भगवान विष्णु की आराधना करने से धन – सम्पति में वृद्धि होती है और जीवन में सुख – शांति की प्राप्त होती है। स्कंद

एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata Ki Aarti)

इस संसार में जन्म लेकर मनुष्य केवल अपने पिछले कर्म का फल ही नहीं भोगता वल्कि जीवन को भक्ति और आराधना में समर्पित कर अपने लिए एक उज्वल जीवन का सृजन कर सकता है। एकादशी व्रत के माहात्म्य से संकेत प्राप्त होता है कि ये व्रत हमारे आने वाले जीवन को सुखद बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। हिंदू

शिव और भस्मासुर की कहानी (Shiv Bhasmasura Story)

शिव और भस्मासुर की कहानी (Shiv Bhasmasura Story) किसी समय भस्मासुर (Bhasmasura) नाम का एक राक्षस पृथ्वी पर रहता था। वह बहुत ही साहसी और निर्भीक था परन्तु वह महान मुर्ख था। वह कुछ भी करने से पहले उसके बारे में सोचता नहीं था । वह संसार में सबसे शक्तशाली बनने का चाहत रखता था। एक दिन, उन्होंने भगवान शिव

श्री चित्रगुप्त जी की आरती (Chitragupt Ji Ki Aarti)

यह चित्रगुप्त आरती (Chitragupt Aarti), भगवान चित्रगुप्त की पूजा में पाठ किया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार संपूर्ण विश्व के सृष्टिकर्ता भगवान ब्रम्हा हैं । भगवान ब्रम्हा ने सबसे पहले अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों से 16 पुत्र का निर्माण किये। श्री चित्रगुप्तजी उनकी 17 वीं रचना माना जाता है, जो कि भगवान ब्रम्हा के पेट से उत्पन्न हुए

आरती श्री गणपति जी

यह गणपति आरती (Ganapati Aarti) का पाठ विघ्नहर्ता गणेश (Ganesh) की पूजा में अवश्य करना चाहिए। गणेश, जिन्हें गणपति, विनायक या अन्य कई नामों से जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवताओं में से एक है। उनकी पूजा भारत, श्रीलंका, फिजी, थाईलैंड, बाली (इंडोनेशिया), बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में होती है।गणेश की भक्ति