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Month: February 2019

ये कम ही लोगों को ज्ञात है कि भगवान भोले नाथ की तीन पुत्रियाँ भी थी

भोले नाथ की तीन पुत्रियाँ (Three daughters of Shiva) संसार में सर्वाधिक प्रसिद्ध देवता हैं देवाधिदेव महादेव। ये त्रिलोकी नाथ यानि तीनों लोकों के स्वामी हैं। बहुत ही कम लोगों को मालुम है कि उनके 6 संतानें हैं जिनमें 3 पुत्र और 3 पुत्रियाँ हैं जिसका जिक्र शिव पुराण में किया गया है। भगवान शिव के २ पुत्र गणेश और

गायत्री माता की आरती (Gayatri Mata Aarati)

गायत्री माता की आरती (Gayatri Mata Aarati) जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह दारिद्र्य दैन्य हर्त्री॥१॥ ब्रह्मरूपिणी, प्रणत पालिनी, जगत धातृ अम्बे। भव-भय हारी, जन हितकारी, सुखदा जगदम्बे॥२॥ भयहारिणि, भवतारिणि, अनघे अज आनन्द राशी। अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी॥३॥ कामधेनु सत-चित-आनन्दा जय गंगा गीता। सविता

लक्ष्मीजी की आरती (Lakshami Mata Aarati)

लक्ष्मीजी की आरती (Lakshami Mata Ki Aarati) महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी | हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता | तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…. उमा ,रमा,ब्रम्हाणी, तुम जग की माता | सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…. दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता

सरस्वती मां की आरती (Saraswati Mata Ki Aarti)

सरस्वती मां की आरती (Saraswati Mata Ki Aarti) विद्या की देवी माता सरस्वती की आरती और उनकी स्तुति करने से अज्ञानता दूर होती है और ज्ञान एवं बुद्धि की प्राप्ति होती है। जो भक्त हंसवाहिणी माता सरस्वती की आरती पूरी श्रद्धा पूर्वक करते हैं उनका जीवन प्रकाशमय हो जाता है। माता जी की कृपा से वो मनुष्य ज्ञान , बुद्धि

भगवान विष्णु जी की आरती (Vishnu Aarti)

भगवान विष्णु जी की आरती (Vishnu Aarti) – Om Jai Jagdish Hare Aarti lyrics in hindi संसार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे (Om Jai Jagdish Hare) है । यह आरती भगवान नारायण (विष्णु ) को समर्पित है परन्तु यह किसी देवता के पूजा के बाद गया जा सकता है । कुछ भक्तों का मान्यता है कि

संतोषी माता आरती (Santoshi Mata Ki Aarti)

संतोषी माता आरती (Santoshi Mata Ki Aarti) माता संतोषी के पूजा उपरांत संतोषी माता की आरती की जाती है। किसी भी पूजा में आरती बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर आप के जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट है तो माता की पूजन से वह दूर हो जायेगा। १६ शुक्रवार व्रत करने  और संतोषी माता का व्रत कथा सुनने

श्री रामचन्द्रजी की आरती (Shri Ram Chandra Ji Ki Aarati)

श्री रामचन्द्रजी की आरती (Shri Ram Chandra Ji Ki Aarati) श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । श्री राम श्री राम…. कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं । पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण

शनि देवजी की आरती (Shri Shani Dev Ji Ki Aarti)

शनि देव की आरती (Shri Shani Dev Ki Aarti) शनिदेव की पूजा कर शनि देव की व्रत कथा करें उसके बाद शनि देवजी की आरती (Shani Dev Ji Ki Aarti) करें। इससे उनके बुरे प्रकोप से बचा जा सकता है। शनि देव का प्रकोप हो या ना हो सभी को शनिदेव की आरती प्रत्येक शनिवार को करनी ही चाहिए। जय

शिवजी की आरती (Shri Shiv Ji Ki Aarti)

शिवजी की आरती (Shiv Ji Ki Aarti) शिव की पूजा, आराधना या जलाभिषेक के बाद शिव जी की आरती (Shiv Ji Ki Aarti) अवश्य करना चाहिए इससे शिव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।  महादेव पूजा के दौरान शिव चालीसा का भी पाठ करें तो शीघ्रति शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं | सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव

श्री सत्यानारयण जी की आरती (Satyanarayan Ji Ki Aarti)

श्री सत्यानारयण जी की आरती (Satyanarayan Ji ki Aarti) : Om Jai Lakshmi Ramana जिस घर में श्री सत्यानारयण जी की पूजा, कथा और श्री सत्यानारयण जी की आरती (Shri Satyanarayan Ji ki Aarti) की जाती है उस घर में सुख-शांति , धन -सम्पति, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। सभी बाधाएँ दूर होती है। घर में किसी की आकाल मृत्यु

हनुमानजी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)

हनुमानजी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti) हनुमान जी हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। ये भगवान राम के परम भक्त हैं। ये अष्टचिरंजीवी में से एक हैं। अतः ये अमर हैं। इनकी पूजा में हनुमान चालीसा (Hnuman Chalisa) पाठ  और उसके बाद हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)  का विशेष महत्व है। हनुमान जी इससे शीघ्र

श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa)

श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa) हिन्दू धर्म में सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है की इनकी पूजा से मनुष्य को यस, मान समान, धन, पुत्र आदि की मनोकामना पूरी होती है। ये समस्त जगत के प्राणी के ऊर्जा का स्रोत हैं। सूर्य की आराधना में श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa) का पाठ अवश्य करना चहिये। प्रत्यक्ष